लड़ाकू-विमानों के पार्ट्स बनाने वाली BEL के अफसरों पर FIR

लड़ाकू-विमानों के पार्ट्स बनाने वाली BEL के अफसरों पर FIR

6 के खिलाफ CBI ने दर्ज किया केस, गलत तरीके से दिए 1575 करोड़ के ठेके

अलार्म इण्डिया न्यूज

गाजियाबाद। CBI ने रक्षा मंत्रालय के उपक्रम भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) गाजियाबाद के 6 अधिकारियों समेत 12 के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। इसमें 3 कंस्ट्रक्शन कंपनियां और इनके तीन डायरेक्टर भी आरोपी बनाए गए हैं। आरोप है कि BEL अधिकारियों ने रक्षा मंत्रालय की 10 साइटों पर 1575 करोड़ रुपए के ठेके मनमाने तरीके से दिए और इन कंपनियों को लाभ पहुंचाया।

मंत्रालय के लेटर पर शुरू हुई थी जांच
CBI इंस्पेक्टर अमित कुमार ने दिल्ली ब्रांच में ये FIR सात दिसंबर 2022 को दर्ज कराई है, जिसमें कुल 12 आरोपियों पर IPC सेक्शन- 420, 120बी और PC एक्ट की धारा 13(2), 13(1)(D) लगाई गई है। दरअसल, रक्षा मंत्रालय में उपसचिव गोकुल नागरकोटी के लेटर पर पिछले साल एक जांच प्रारंभ हुई थी, जिसके बाद CBI ने अब नामजद FIR की है।

CBI इंस्पेक्टर अमित कुमार ने दिल्ली ब्रांच में ये FIR सात दिसंबर 2022 को दर्ज कराई है। – Dainik Bhaskar
CBI इंस्पेक्टर अमित कुमार ने दिल्ली ब्रांच में ये FIR सात दिसंबर 2022 को दर्ज कराई है।

ये बनाए गए आरोपी

1- सुनील कुमार शर्मा, GM नेटवर्क सेंटरिंग सिस्टम, BEL गाजियाबाद
2- आरके हांडा, GM नेटवर्क सेंटरिंग सिस्टम, BEL गाजियाबाद
3- एसएस चौधरी, सीनियर DGM मार्केटिंग, BEL गाजियाबाद
4- गुरजीत सिंह, सीनियर DGM सीएस, BEL गाजियाबाद
5- बीपी पाहुजा, GM ईएस, BEL बंगलुरु
6 – मनीष गोयल, DGM इन्फ्रा, BEL गाजियाबाद
7 – सुरेश कुमार आनंद, पार्टनर RD कंस्लटेंट
8 – सुधीर कुमार मारवाह, डायरेक्टर SR अशोक एंड एसोसिएट, दिल्ली
9- राहुल भूचर, डायरेक्टर CS कंस्ट्रक्शन, नई दिल्ली
10 – मैसर्स RD कंस्लटेंट, वसंतकुंज नई दिल्ली
मैसर्स SR अशोक एंड एसोसिएट, दिल्ली
11- मैसर्स CS कंस्ट्रक्शन, वसंत कुंज दिल्ली

रक्षा मंत्रालय के लेटर पर CBI ने पिछले साल इस केस में जांच शुरू की थी और अब केस दर्ज किया गया है। –
रक्षा मंत्रालय के लेटर पर CBI ने पिछले साल इस केस में जांच शुरू की थी और अब केस दर्ज किया गया है।

CBI जांच में ये आरोप पाए गए

प्रारंभिक परियोजना रिपोर्ट (PPR) के ठेके देने में साल-2011 से 2017 के बीच DPR में घोर अनियमितताएं बरती गईं। DPR बनाने के लिए RD कंसल्टेंट को रखा गया। इस कंपनी को रखने के लिए सिर्फ औपचारिकताएं पूरी की गईं, जबकि सारी बातचीत BEL अधिकारियों ने पहले ही कर ली थी।
8 सितंबर 2011 को ब्लास्ट प्रूफ के लिए RD कंसल्टेंट से DPR तैयार कराते वक्त BEL ने वर्क्स कॉन्ट्रैक्ट मैनुअल का पालन नहीं किया।
रक्षा मंत्रालय की 10 साइटों पर होने वाले सिविल वर्क के लिए जो प्रारंभिक परियोजना रिपोर्ट बनाई गई, उसमें कहीं पर भी डिजाइन और लागत का उल्लेख नहीं किया गया।
BEL ने चहेती कंस्ट्रक्शन कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए इनकी निविदाएं ऑनलाइन की बजाए ऑफलाइन स्वीकार कीं थी।
इन कंपनियों को जब 1575 करोड़ रुपए के टेंडर दिए गए, उस वक्त BEL ने पूर्व योग्यता (PQ) मानदडों का उल्लंघन करते हुए निविदा डालने वाली कंपनियों को शॉर्ट लिस्ट नहीं किया।

ये लोग आरोपी बनाए गए हैं

साइट पर दो जगह जमीन धंसी
CBI की जांच में ये बात भी सामने आई कि जिन 10 साइटों पर सिविल कंस्ट्रक्शन का ठेका मिला था, उनमें से दो साइटों पर जून-2017 में जमीन धंसने की घटनाएं सामने आईं। एक जगह साइड की दीवार गिर गई तो दूसरी जगह साइड की दीवारें मिट्टी के कारण ढह गईं। CBI ने माना कि ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि SOP तैयार करते वक्त डिजाइन सलाहकार परिस्थतियों से अवगत नहीं थे। डिजाइन सलाहकार के साथ एग्रीमेंट के अनुसार RD कंसल्टेंट को महीने में एक बार साइट का दौरा करना था, जो नहीं हुआ।

BEL मैनेजर की नियुक्ति पर भी उठाए सवाल

निर्माण कार्यों में हुई इस गड़बड़ी के लिए CBI ने BEL गाजियाबाद के मैनेजर (इन्फ्रा) मनीष गोयल को जिम्मेदार ठहराया है। इस पद पर नौकरी के लिए 10-12 साल का अनुभव चाहिए, लेकिन मनीष गोयल पर जॉइनिंग के वक्त ये अनुभव नहीं था। आरोप है कि उन्होंने नौकरी पाते वक्त आवेदन पत्र में ऐप्रैंटिस टेन्योर के तथ्यों को छिपाकर गलत जानकारी दर्ज की। इसके अलावा मनीष गोयल ने वेंडरों द्वारा जमा किए जा रहे बिल का 10 फीसदी सत्यापन भी नहीं किया।

मैसर्स SR अशोक एंड एसोसिएट, दिल्ली
मैसर्स CS कंस्ट्रक्शन, वसंत कुंज दिल्ली
रक्षा मंत्रालय के लेटर पर CBI ने पिछले साल इस केस में जांच शुरू की थी और अब केस दर्ज किया गया है

रक्षा मंत्रालय के लेटर पर CBI ने पिछले साल इस केस में जांच शुरू की थी और अब केस दर्ज किया गया है।
CBI जांच में ये आरोप पाए गए

प्रारंभिक परियोजना रिपोर्ट (PPR) के ठेके देने में साल-2011 से 2017 के बीच DPR में घोर अनियमितताएं बरती गईं। DPR बनाने के लिए RD कंसल्टेंट को रखा गया। इस कंपनी को रखने के लिए सिर्फ औपचारिकताएं पूरी की गईं, जबकि सारी बातचीत BEL अधिकारियों ने पहले ही कर ली थी।
8 सितंबर 2011 को ब्लास्ट प्रूफ के लिए RD कंसल्टेंट से DPR तैयार कराते वक्त BEL ने वर्क्स कॉन्ट्रैक्ट मैनुअल का पालन नहीं किया।
रक्षा मंत्रालय की 10 साइटों पर होने वाले सिविल वर्क के लिए जो प्रारंभिक परियोजना रिपोर्ट बनाई गई, उसमें कहीं पर भी डिजाइन और लागत का उल्लेख नहीं किया गया।
BEL ने चहेती कंस्ट्रक्शन कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए इनकी निविदाएं ऑनलाइन की बजाए ऑफलाइन स्वीकार कीं थी।
इन कंपनियों को जब 1575 करोड़ रुपए के टेंडर दिए गए, उस वक्त BEL ने पूर्व योग्यता (PQ) मानदडों का उल्लंघन करते हुए निविदा डालने वाली कंपनियों को शॉर्ट लिस्ट नहीं किया।

ये लोग आरोपी बनाए गए हैं

साइट पर दो जगह जमीन धंसी
CBI की जांच में ये बात भी सामने आई कि जिन 10 साइटों पर सिविल कंस्ट्रक्शन का ठेका मिला था, उनमें से दो साइटों पर जून-2017 में जमीन धंसने की घटनाएं सामने आईं। एक जगह साइड की दीवार गिर गई तो दूसरी जगह साइड की दीवारें मिट्टी के कारण ढह गईं। CBI ने माना कि ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि SOP तैयार करते वक्त डिजाइन सलाहकार परिस्थतियों से अवगत नहीं थे। डिजाइन सलाहकार के साथ एग्रीमेंट के अनुसार RD कंसल्टेंट को महीने में एक बार साइट का दौरा करना था, जो नहीं हुआ।

BEL मैनेजर की नियुक्ति पर भी उठाए सवाल

निर्माण कार्यों में हुई इस गड़बड़ी के लिए CBI ने BEL गाजियाबाद के मैनेजर (इन्फ्रा) मनीष गोयल को जिम्मेदार ठहराया है। इस पद पर नौकरी के लिए 10-12 साल का अनुभव चाहिए, लेकिन मनीष गोयल पर जॉइनिंग के वक्त ये अनुभव नहीं था। आरोप है कि उन्होंने नौकरी पाते वक्त आवेदन पत्र में ऐप्रैंटिस टेन्योर के तथ्यों को छिपाकर गलत जानकारी दर्ज की। इसके अलावा मनीष गोयल ने वेंडरों द्वारा जमा किए जा रहे बिल का 10 फीसदी सत्यापन भी नहीं किया।

क्या है BEL?
भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय का उपक्रम है। ये गाजियाबाद के साहिबाबाद इंडस्ट्रियल एरिया स्थित है। यहां पर लड़ाकू विमानों के पार्ट तैयार किए जाते हैं। सुरक्षा की दृष्टि से यह स्थान अति महत्वपूर्ण है। भारत में बनने वाले भारतीय वायुसेना के सी-295 विमान स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर प्रणाली से लैस होंगे। ये प्रणाली भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड विकसित करेगी। (साभार)

About The Author

निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

Learn More →

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

अपडेट खबर के लिए इनेबल करें OK No thanks