सरकार द्वारा 19 नवम्बर “महारानी लक्ष्मीबाई की जयंती” पर शौचालय घोषित किये जाने के विरोध के बावत |

झांसी, न्याय अधिकार चौपाल के पदाधिकारियों की आवश्यक बैठक अध्यक्ष बी. एल. भास्कर एड. की अध्यक्षता में हुई जिसमें सरकार द्वारा वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई की जयंती 19 नवम्बर को सरकार द्वारा शौचालय दिवस के रूप में मनाये जाने के घोषणा हुई उसपर नाराजगी व्यक्त करते हुये महारानी लक्ष्मीबाई के अपमान के साथ – साथ बुंदेलखंडवासियों के मान सम्मान पर चोट पहुंचाई गई जिसका कड़े शब्दों में विरोध किया गया अध्यक्ष बी. एल. भास्कर नें कहा कि इस तरह के निर्णय करने से झाँसी की जनता ही नहीं देश की जनता का घोर अपमान है जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा इसके पहले भी सरकार द्वारा एक गलत निर्णय और लिया था जब झाँसी रेलवे स्टेशन का नाम वीरांगना लक्ष्मीबाई किया गया जिसमें झाँसी नहीं जोड़ा था जिससे यहाँ के लोगों की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची थी और झाँसीवासियों ने मिलकर कडा विरोध करते हुये आन्दोलन किया था तब मजबूर होकर सरकार द्वारा रेलवे स्टेशन का नाम वीरांगना लक्ष्मीबाई झाँसी किया गया | चौपाल के सचिव अनिल शर्मा ने कहा कि सरकार एवं प्रशासनिक अधिकारीयों द्वारा बिना सोचे समझे गलत निर्णय करने से जनता की कमाई का लाखों – करोड़ों रुपया बर्बाद तो होता ही है साथ में मान – सम्मान को गहरी चोट पहुँचती है | इसी तरह का एक गलत प्रस्ताव नगर निगम झाँसी की ओंर से अधिकारीयों द्वारा शासन को भेजा गया था जिसमें झाँसी का स्थापना दिवस 2002 बताया गया था जिसपर भी झाँसीवासियों के मान – सम्मान को चोट पहुंची थी | चौपाल की सदस्या श्रीमती राजकुमारी नें कहा कि रानी झाँसी की जयंती शौचालय दिवस के रूप में मनाने का निर्णय महिलाओं के अपमान है इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे |
बैठक में उपस्थित सभी नें सरकार से निर्णय वापिस लेने की मांग की है |
इसमें प्रमुख रूप से मृत्युंजय एडवोकेट, सत्यम यादव, राहुल जोशी, बी. के. वर्मा, कुलदीप गुप्ता आदि उपस्थित रहे | भवदीय