
“कुलपति पाठक के दस करीबी निशाने पर”
आगरा, प्रमुख संवाददाता। डॉक्टर भीमराव आंबेदकर विवि में हुए कमीशन के खेल की आंच पूर्व कुलपति विनय कुमार पाठक के करीबियों पर भी आ सकती है। दस करीबी एसटीएफ के निशाने पर हैं। हाईटेक तरीके से उन पर नजर रखी जा रही है। एसटीएफ यह पता लगाने में जुटी है कि पिछले एक साल में किसी ने कौन सी प्रोपर्टी खरीदी है। किसके किस बैंक में लॉकर है। कमीशन की रकम कहां ठिकाने लगाई गई है।
पूर्व कुलपति विनय कुमार पाठक और उनके खास अजय मिश्रा के खिलाफ लखनऊ के इंदिरा नगर थाने में रंगदारी, गाली-गलौज, जान से मारने की धमकी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा लिखा गया था। मुकदमे की जांच एसटीएफ लखनऊ यूनिट के पास है। एसटीएफ आगरा यूनिट इस मुकदमे से पहले से विवि में भ्रष्टाचार की जांच कर रही है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर शासन ने यह जांच एसटीएफ आगरा यूनिट को सौंपी थी। एसटीएफ ईडी की तर्ज पर संपत्तियों की जानकारी जुटा रही है। एसटीएफ को जानकारी मिली है कि कुलपति के कुछ करीबियों ने रकम बैंक लॉकरों में रख रखी है। ठोस सोने की भी खरीद-फरोख्त की गई थी। एक करीबी ने ब्रांडेड शोरूम से लाखों रुपये के जेवरात खरीदे थे। एसटीएफ को जानकारी मिली है कि कुलपति पाठक अपने रिश्तेदार और खास लोगों पर मेहरबान रहते थे। सामान की खरीद-फरोख्त से लेकर ठेके तक उन लोगों को दिए जाते थे। इसमें भी कमीशन का खेल चलता था। एसटीएफ को वेतन और संबद्धता में खेल की जानकारियां मिल रही हैं। पिछले दिनों एसटीएफ ने एक ईमेल आईडी जारी की थी। उस पर गोपनीय रूप से सूचनाएं आ रही हैं। हालांकि एसटीएफ ने अभी उनका खुलासा नहीं किया है।