
*हाइवे पर नया पुल बना, पुराने की देखभाल कम*
कासगंज। शहर के नदरई गेट से नदरई गांव के बीच काली नदी पर एक पुराना पुल बना हुआ है। पुल काफी पुराना होने और यातायात के भारी दबाब के चलते सेतु निगम ने बराबर में एक नया पुल बना दिया। जिस पर कासगंज की ओर से एटा-आगरा-हाथरस की ओर जाने वाले वाहन गुजरते हैं। जबकि पुराने पुल पर एटा-आगरा और मथुरा-हाथरस की ओर से कासगंज की ओर आने वाले छोटे एवं भारी वाहन चलते हैं। यहां भी पुराने पुल पर होकर गुरजने वाले भारी वाहनों को देखते हुए इसकी समय-समय पर देखरेख की जरूरत दिखती है।”
कासगंज, । *गुजरात के मोरबी में हुए पुल पर बड़े हादसे के बाद जनपद के पुराने पुलों को लेकर भी लोगों में चिंता पनप गई है।* यातायात के दबाब के बाद भी पुराने पुलों के रखरखाव को लेकर शासन से लेकर प्रशासन तक गंभीर नहीं दिख रहे हैं। यहां तक कि सबसे पुराने 130 से अधिक साल पुराने नदरई जलसेतु को लेकर अभी निर्माण स्थिरता परीक्षण तक कराने की जरूरत महसूस नहीं की गई है। जबकि पुल के आसपास की सड़कें तक कई बार धंस चुकी हैं।
नदरई पर सिविल इंजीनियरिंग के विशेष नमूना माने जाने वाले नदरई पुल बेहद पुराना है। इसका निर्माण ब्रिटिश हकूमत के दौरान वर्ष 1888 के समय हुआ था। पुल पर हजारा नहर और नीचे काली नदी बहती है। पुल के बराबर हिस्से और निचले हिस्से पर चौबीस घंटे अधिक जलराशि रहती है।
ऐसे में पुल की देखभाल को लेकर स्थानीय स्तर पर बात उठती रही है। पुल की देखरेख का जिम्मा नरौरा खंड पर है। पुल पर रोजाना स्थानीय काफी लोगों और बाहर से आने वाले पर्यटकों का भी आना जाना होता है।
*समय-समय पर पुरानी संरचनाओं का निर्माण स्थिरता परीक्षण होता है, संभावित हादसों से बचने के लिए यह एक अनिवार्य प्रक्रिया है। यहां नदरई एक्वाडक्ट का परीक्षण की जरूरत दिखती है। पुराना पुल है और इस पर अधिक जल रहता है।*
अमित तिवारी, इंजीनियर
*शहर में पर्यटकों के लिए देखने योग्य नदरई पुल को आगे भी मजबूत रखने के लिए इसके सेतु निगम को इसका सर्वेक्षण कराना चाहिए। यह पुल प्राचीन होने के कारण इसे देखने के लिए दूर दराज से पर्यटकों का आवागमन होता है।* -अश्वनी चतुर्वेदी, सामाजिक कार्यकर्ता