
मुख्यमंत्री जी आपके आगमन का तो स्वागत है, लेकिन एटा की परेशान हाल जनता से न मिलना…
एटा। मुख्यमंत्री जी एटा में आपके द्वितीय बार आगमन का स्वागत है। लेकिन एटा की परेशान हाल जनता से इस बार भी न मिलना और न पत्रकार वार्ता के लिए समय निर्धारित करना, मेरी नजर में एटा की जनता और उसकी समस्याओं की अनदेखी करने जैसा है। प्रदेश के मुख्यमंत्री आयें और जनता उनसे मिल भी न पाये अपनी समस्याओं को उन्हें बता भी न पाये तो ऐसा आगमन किसी भी तरह सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए किया गया दौरा ही कहा जाएगा। मान्यवर पिछली बार भी आप आए थे एक रात्रि विश्राम भी किया था तब एटा की मीडिया सिर्फ फोटो खींचने और आपकी खबरें छापने तक ही सीमित रही थी। हैलीकाॅप्टर में बैठते समय मीडिया से बात आपने काफी दूरी बरतते हुए खड़े-खड़े हैलीपैड पर की थी। जनपद की सम्पूर्ण जानकारी तो आपको वहां के पत्रकारों से मिलेगी। आपका प्रशासन और आपके विधायक तो सब कुछ ठीकठाक ही बताएंगे, क्योंकि उन्होंने ‘यस सर’ और ‘जी सर’ के अलावा कुछ सीखा ही नहीं है। एटा की समस्याओं को वे विधानसभा सत्र में उठाते नहीं हैं, क्योंकि शायद वे अपने वरिष्ठ पार्टीजनों का लिहाज करते हों या वे ये सोचते हों कि अपना काम बनता, भाड़ में जाये जनता। मुख्यमंत्री जी आपने जातिगत समीकरण साधने के लिए जो दो-दो उप मुख्यमंत्री बनाये हैं वे किसी भी काम के नहीं हैं, क्योंकि उन्हें अधिकारियों की शिकायत दी जाए तो वे उसी विभाग को भेज देते हैं उनको दिये गए शिकायती पत्रों की जांच ही नहीं होती। ब्राह्मणों को साधने के लिए पूर्व में मा0 दिनेश शर्मा को उपमुख्यमंत्री बनाया गया था और अब मा0 ब्रजेश पाठक जी को बनाया है। जिस प्रकार दिनेश शर्मा जी ब्राह्मणों के लिए उपयोगी साबित नहीं हुए वैसे ही ब्रजेश पाठक जी का हाल है। मैं दो बार उप मुख्यमंत्री पाठक जी से मिल चुका हूं दो बार अपने शिकायती पत्र दे चुका हूं लेकिन सब बेकार साबित हुआ है। एटा जनपद की जनता अधिकारियों से इतनी त्रस्त है कि उसका कोई वर्णन नहीं किया जा सकता। सिर्फ सांसद, विधायकों के कार्य अधिकारी कर रहे हैं और जनता को ठेंगा दिखा रहे हैं। आप भी जनता से मिलेंगे नहीं फिर तो उसे सिर्फ रामभरोसे ही रहना है और राम मंदिर आप बनवा ही रहे हैं। सांसद विधायक और अधिकारी माल खायें और जनता राम भजन करे।